वो खड़े थे

वो खड़े थे
गार्डन ए ईडन में
परिवार का बंगाली रसगुल्ला लिए... 🥰

हमारा तो पेट पहले ही भर चुका था... 😇
10 साल के कैंसर से..
उसके पिट्ठे हुए शेर सुन सुन के 🫠
हमारे कुत्ते के कान पक चुके हैं

कभी रोज..
कभी कुछ..
कभी त्यौहार
कबी रुसवा
कभी रुसवाई

बब्बर ए आजम सिराजुद्दीन दौला
कैंसर फ़ैलता चला गया..
और हम नोट उड़ाते गए

कभी तो जल के मरेगा साला..
कभी तो खाक होंगे इसके अरमान..

कभी तो इस दानव की प्यास बुघेजी

पर शैतान और शैतानी को ना देखिये..
शैतान को गली दीजिए..

ये हैं इनके उच्च विचार..
और ये हैं इनकी सौगात।

कैंसर की किताब: कैंसर के नाम...क्योंकि इंसान ही कैंसर है।

वाह वाह?

dark lol : for every son by law out dere... 😆
bro u 0 in makin : u just dont noe it yet. 😉